Saturday, May 26, 2018

इस कोरियन सीरियल ने दिखाए भारत को पोस्को के सपने... फिर हुई थी तूतीकोरिन जैसी घटनाएं


मेरे लिए इन दो तस्वीरों का ओडिशा और पोस्को से गहरा संबंध है। उस समय शायद 9वीं या 10वीं क्लास में था। डीडी वन (डीडी नेशनल) पर रात साढ़े आठ बजे ये सीरियल आता था। सीरियल का नाम था 'घर का चिराग' (द लैम्प ऑफ द हाउस) और 'समुद्र का बादशाह' (एम्परर ऑफ सी)। मैं इन दोनों सीरियल को चाइनीज समझता था। लेकिन आज सर्च किया तो पता चला कि यह कोरिया का सबसे प्रसिद्ध सीरियल है। इल सीरिय को पूरे विश्व में अलग-अलग नाम और अलग-अलग भाषाओं में प्रसारित किया गया।

सीरियल की कहानी बहुत ही इंस्पायरिंग है। इस सीरियल के दौरान बीच में एक विज्ञापन आता था। इसी सीरियल में मैंने पहली बार पोस्को (POSCO) का विज्ञापन देखा। उस समय उड़ीसा (अब ओडिशा) में पोस्को का प्लांट लगने वाला था। सरकार और कंपनी विज्ञापन के माध्यम से लोगों को पोस्को के फायदे गिना रही थी मसलन रोजगार, अच्छी सुविधाएं पीने का पानी, बच्चों के लिए एजुकेशन और बहुत कुछ। देखने में बहुत अच्छा लगता था। लेकिन वास्तविकता कुछ सालों बाद पता चली।

2005 में पोस्को ने ओडिशा सरकार के साथ समझौता कर 12 मिलियन टन वार्षिक उत्पादन वाली क्षमता का स्टील प्रोजेक्ट जगतसिंहपुर जिले में स्थापित करने की योजना बनाई। यह समझौता विश्व सबसे बड़ा समझौता माना गया क्योंकि पहली बार भारत में किसी विदेशी (दक्षिण कोरिया) कंपनी ने 52 हजार करोड़ रुपए का निवेश किया था।

लेकिन इस प्रोजेक्ट का स्थानीय लोगों ने विरोध किया। ग्रामीणों की जमीनें जबरदस्ती हथियाई जाने लगी, ग्रामीणों के विरोध पर पुलिस और प्रशासन द्वारा बर्बर कार्रवाई की जा रही थी। पोस्को और ओडिशा सरकार ने ग्रामीणों को जो सपने दिखाए वो टूटने लगे थे। सरकार और पोस्को ने प्लांट के लिए लाखों पेड़ों को काट दिया, रोजगार के जितने वायदे किए थे सरकार ने उसे पूरा नहीं किया जिससे ग्रामीणों ने सरकार और पोस्को के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया था।

समझौता होने के बाद ओडिशा सरकार ने पोस्को को 4004 एकड़ की तटीय जमीन भी दी। ग्रामीणों के भारी विरोध के बाद इस प्रोजेक्ट में बाधा आने लगी। ग्रामीणों ने उनकी जमीनों पर हो रहे जबरदस्ती कब्जों का विरोध किया। संयंत्र के निर्माण के लिए मुख्य रूप से पारादीप के पास बंगाल की खाड़ी की उपजाऊ तटीय क्षेत्र ओडिशा सरकार से खरीदा गया, जहां शराब बनाने के लिए अंगूर की खेती का काम होता था, ग्रामीण ने इस जमीन अधिग्रहण का विरोध किया।

यहां की अर्थव्यवस्था बीटल वाइन्स पर ही आधारित थी। धिनकिया के 8 गांवों के 20 हजार लोग, नौगांव और गडकुजंगा की ग्राम पंचायतें भी इस प्रोजेक्ट से प्रभावित थी। स्टील प्लांट के लिए ली गई 4004 एकड़ में से 3000 एकड़ की जमीन सिर्फ वनक्षेत्र था, यहां की रेतीली धरती पर 5000 बीटल वाइन्स (अंगूर की शराब) तैयार की जाती थी। इस वाइनयार्ड्स से किसानों को औसतन 20000 हजार प्रतिमाह कमाई होती थी।

ग्रामीणों में यूनाइटेड एक्शन कमिटी के द्वारा फूड डाली गई। कमिटा प्रभाव सबसे अधिक नौगांव में था, ये सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र था जो पोस्को के समर्थन में था। यहां प्रो-पोस्को और एंटी पोस्को ग्रुप बने। जो आपस में टकराने लगे।

खनन विशेषज्ञों का कहना है कि पोस्को बिना किसी सौदेबाजी के सुंदरगढ़ जिले के खदाधर पहाड़ी क्षेत्र 1200 रुपए प्रति टन के हिसाब से निकाल रहा था जबकि बाजार में उस समय 3500 प्रति टन का भाव चल रहा था।

पहले पोस्को ने ओडिशा में मनमाने तरीके से अधिग्रहण किया। अब तूतीकोरिन में वेदांता ने किया। तूतीकोरिन में वेदांता के स्टरलाइट कॉपर प्लांट ने स्थानीय लोगों को जो सपने दिखाए उस पर गोलियां और लाठियां चलवाई। विपक्षी नेता विरोध ऐसे संयंत्रों और सरकारी की नीतियों का विरोध करते हैं। लेकिन जब स्वयं सत्ता में आते हैं तो व्यापार और भ्रष्टाचार के आगे लोकहित भूल जाते हैं। केंद्र सरकार और राज्य सरकार को इस तरह के संयंत्रों को स्थापित करने से पहले एक अच्छी नीतियां बनानी चाहिए जो लोकहित में हो। ग्रामीणों को हित में हो। उन्हें अच्छे रोजगार के अवसर दे सके और पर्यावरण और स्वास्थ्य का विशेष रखे। 

Wednesday, May 23, 2018

तूतीकोरिन घटना का ये है वेदांता से संबंध...

Image Credit @Mahanagar 24x7

तमिलनाडु के तूतीकोरिन में 22 मई  को स्टरलाइट कॉपर प्लांट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों पर तमिलनाडु पुलिस ने लाठी चार्ज और फायरिंग की। इस फायरिंग में अब तक 12 लोगों की मौत हो गई और लगभग 50 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं।

हिंसा को देखते को तूतीकोरिन में धारा 144 लगा दी गई है। 11 लोगों की मौत के बाद मद्रास हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए 23 मई को इस पर सुनवाई की और प्लांट के विस्तार तहत होने वाले निर्माण पर रोक लगा दी।

स्टरलाइट कॉपर प्लांट  क्या है?

तूतीकोरिन के ग्रामीण जिस स्टरलाइट कॉपर प्लांट का विरोध कर रहे हैं, वह वेदांता लिमिटेड की एक यूनिट है। पहले इसे 'सेसा स्टरलाइट लिमिटेड' और 'सेसा गोआ लिमिटेड' के नाम से जाना जाता था।

वेदांता लिमिटेड विश्व की सबसे बड़ी कंपनी है जो प्राकृतिक संसाधन जिंक सिल्वर, तेल और गैस, लोह, अयस्क, तांबे और एल्यूमीनियम जैसी धातुओं का उत्पादन करती है। धातू के क्षेत्र में कंपनी सर्वोच्च व्यापारिक शक्ति रखती है।

तमिलनाडु और केंद्र शासित प्रदेश दादरा नगर हवेली में वेदांता की कई यूनिट्स है। यह यूनिट्स हर साल 4 लाख मेट्रिक कॉपर को उत्पादन करती है और तूतीकोरिन में बने कोयला आधारित बिजली संयंत्र से 160 मेगावाट बिजली का निर्माण करती है। इसके अलावा, सिलवासा में दो कॉपर रोड्स प्लांट है- एक चिंचपाड़ा और दूसरी पिपरिया में। तूतीकोरिन, एक तटीय शहर, यह देश के सबसे बड़े बंदरगाहों (पोर्ट) में से एक है, जो कंपनी के संचालन और ट्रांसपोर्टेशन  की सहायता करता है।

स्टरलाइट कॉपर के खिलाफ विरोध लगभग दो दशक पहले शुरु हुआ था। लेकिन विरोध कभी इतना उग्र रूप नहीं ले पाया। इस साल की शुरुआत में कंपनी ने इस प्लांट का विस्तार करने की घोषणा की, जिसके बाद लोगों ने इसका विरोध करना शुरु किया। कंपनी अपनी विस्तार नीति के तहत अपने उत्पादन को दोगुना करना चाहती थी। कंपनी पहले जहां 4 लाख मेट्रिक टन प्रतिवर्ष उत्पाद कर रही है, वहीं विस्तार के बाद यह 8 लाख मेट्रिक टन प्रतिवर्ष करना चाहती है।

भारत में वेदांता की स्टरलाइट और आदित्य बिरला ग्रुप की हिंडाल्को इंडस्ट्रीस लिमिटेड सबसे ज्यादा कॉपर उत्पादन करने वाला प्लांट है। इसके साथ-साथ केंद्र सरकार की सार्वजनिक ईकाई हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड की क्षमता 99,500 मेट्रिक टन प्रतिवर्ष है। हिंडाल्को इंडस्ट्रीज और स्टरलाइट भारत के कॉपर बाजार में प्रभुत्व रखते हैं। वर्तमान में हिंडाल्को 5 लाख टन और स्टरलाइट 4 लाख टन कॉपर का सालाना उत्पादन करते हैं।

ग्रामीणों को गंभीर बीमारियां

तूतीकोरिन में स्थापित इस स्टरलाइट कॉपर प्लांट ने पर्यावरण के मानकों को पूरा करने में असफल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि प्लांट की वजह से जमीन का पानी दूषित हो रहा है, जिसका सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि स्टरलाइट प्लांट से निकलने वाले धुएं और रसायन से गांव के लोगों को कैंसर और सांस की बिमारियां भी हो रही हैं। करीब 18 गांव के लोग इस प्लांट का विरोध कर रहे हैं।

Translated By Me From-Indian Express