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| Image Credit @Mahanagar 24x7 |
तमिलनाडु के तूतीकोरिन में 22 मई को स्टरलाइट कॉपर प्लांट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों पर तमिलनाडु पुलिस ने लाठी चार्ज और फायरिंग की। इस फायरिंग में अब तक 12 लोगों की मौत हो गई और लगभग 50 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं।
हिंसा को देखते को तूतीकोरिन में धारा 144 लगा दी गई है। 11 लोगों की मौत के बाद मद्रास हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए 23 मई को इस पर सुनवाई की और प्लांट के विस्तार तहत होने वाले निर्माण पर रोक लगा दी।
स्टरलाइट कॉपर प्लांट क्या है?
तूतीकोरिन के ग्रामीण जिस स्टरलाइट कॉपर प्लांट का विरोध कर रहे हैं, वह वेदांता लिमिटेड की एक यूनिट है। पहले इसे 'सेसा स्टरलाइट लिमिटेड' और 'सेसा गोआ लिमिटेड' के नाम से जाना जाता था।
वेदांता लिमिटेड विश्व की सबसे बड़ी कंपनी है जो प्राकृतिक संसाधन जिंक सिल्वर, तेल और गैस, लोह, अयस्क, तांबे और एल्यूमीनियम जैसी धातुओं का उत्पादन करती है। धातू के क्षेत्र में कंपनी सर्वोच्च व्यापारिक शक्ति रखती है।
तमिलनाडु और केंद्र शासित प्रदेश दादरा नगर हवेली में वेदांता की कई यूनिट्स है। यह यूनिट्स हर साल 4 लाख मेट्रिक कॉपर को उत्पादन करती है और तूतीकोरिन में बने कोयला आधारित बिजली संयंत्र से 160 मेगावाट बिजली का निर्माण करती है। इसके अलावा, सिलवासा में दो कॉपर रोड्स प्लांट है- एक चिंचपाड़ा और दूसरी पिपरिया में। तूतीकोरिन, एक तटीय शहर, यह देश के सबसे बड़े बंदरगाहों (पोर्ट) में से एक है, जो कंपनी के संचालन और ट्रांसपोर्टेशन की सहायता करता है।
स्टरलाइट कॉपर के खिलाफ विरोध लगभग दो दशक पहले शुरु हुआ था। लेकिन विरोध कभी इतना उग्र रूप नहीं ले पाया। इस साल की शुरुआत में कंपनी ने इस प्लांट का विस्तार करने की घोषणा की, जिसके बाद लोगों ने इसका विरोध करना शुरु किया। कंपनी अपनी विस्तार नीति के तहत अपने उत्पादन को दोगुना करना चाहती थी। कंपनी पहले जहां 4 लाख मेट्रिक टन प्रतिवर्ष उत्पाद कर रही है, वहीं विस्तार के बाद यह 8 लाख मेट्रिक टन प्रतिवर्ष करना चाहती है।
भारत में वेदांता की स्टरलाइट और आदित्य बिरला ग्रुप की हिंडाल्को इंडस्ट्रीस लिमिटेड सबसे ज्यादा कॉपर उत्पादन करने वाला प्लांट है। इसके साथ-साथ केंद्र सरकार की सार्वजनिक ईकाई हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड की क्षमता 99,500 मेट्रिक टन प्रतिवर्ष है। हिंडाल्को इंडस्ट्रीज और स्टरलाइट भारत के कॉपर बाजार में प्रभुत्व रखते हैं। वर्तमान में हिंडाल्को 5 लाख टन और स्टरलाइट 4 लाख टन कॉपर का सालाना उत्पादन करते हैं।
ग्रामीणों को गंभीर बीमारियां
तूतीकोरिन में स्थापित इस स्टरलाइट कॉपर प्लांट ने पर्यावरण के मानकों को पूरा करने में असफल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि प्लांट की वजह से जमीन का पानी दूषित हो रहा है, जिसका सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि स्टरलाइट प्लांट से निकलने वाले धुएं और रसायन से गांव के लोगों को कैंसर और सांस की बिमारियां भी हो रही हैं। करीब 18 गांव के लोग इस प्लांट का विरोध कर रहे हैं।
Translated By Me From-Indian Express

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