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| ईस्ट किदवई नगर में पुनर्विकास |
साल 2010 में दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स होने वाले थे, केंद्र और दिल्ली सरकार को दिल्ली को चमकाना था। फिर क्या दिल्ली को चमकाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम चमकाने के लिए एक कलमाणी जी को नियुक्त किया गया। फिर क्या दिल्ली में कलमाणी योजना लागू हुई। सड़कों की चौड़ाई को दोगुनी करने का प्लान बना।
सबसे पहले सड़क के किनारे खड़े बड़े पेड़ों को बांधा गया। बांधने के बाद उन्हें कहीं ले गए जो आज तक लापता हैं। फिर योजना बनी की सड़क के दोनों ओर पहले फुटपाथ, फिर साइकिल लेन और उसके बाद मुख्य सड़क होगी। योजना पर काम शुरु हुआ। सड़क और हमारा का विकास हो गया, अब फुटपाथ और मुख्य सड़क के बीच साइकिल लेन थी। सिंगल लेन की सड़कें अब डबल हो गईं और डबल लेन की सड़कें भी डबल हो गईं। सड़क के किनारे लगे पेड़ अब पौधों के रूप में हो गए। पौधे डिवाइडर बन गए। डिवाइडर में लगे पौधे को पेड़ बनने का मौका नहीं दिया, इसलिए कॉमनवेल्ध गेम्स तक ही जी पाए।
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| ईस्ट किदवई नगर का पुनर्विकास |
खैर, अब जिन 7 कलोनियों का विकास होना है, उसमें लगभग 20000 पेड़ों की कटाई होनी है। ऐसा मैं नहीं, जिन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई है, केके मिश्रा... वो कह रहे हैं। केके मिश्रा कैग की रिपोर्ट का हवाला दे चुके हैं। केके मिश्रा कहते हैं कि कैग की रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली में 9 लाख पेड़ों की कमी है। अब बात यह है कि पहले 9 लाख पेड़ गए कहां? अगर नहीं हैं तो सरकार कैग की रिपोर्ट को गंभीरता से क्यों नहीं ले रही हैं। सरकार दिल्ली में पेड़ क्यों नहीं लगाती? सरकार एक तो पेड़ नहीं लगा रही है और विकास के नाम पर पेड़ काटने की तैयारी कर रही है। वो भी हजारों की संख्या में।
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| नौरोजी नगर में पेड़ों की कटाई के बाद बनता 'विश्व व्यापार केंद्र' |
यह दिल्ली और दिल्लीवासियों के लिए राहत की खबर है कि एनजीटी और दिल्ली हाईकोर्ट ने पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है। अब सिर्फ सुनवाई होगी। लेकिन पेड़ तो कटेंगे ही। अगर नहीं कटे तो गिरेंगे ही। यहां नहीं कहीं और दिल्ली में, दिल्ली के बाहर। पर्यावरणविद और हम कितना हल्ला मचाएंगे? विकास प्रकृति के क्षरण पर ही निर्भर है!



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