![]() |
| दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया (फोटोः एके फेसबुक) |
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री-शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया सहित आम आदमी पार्टी सार्वजनिक तौर पर ढिंढोरा पीट रहे हैं कि उन्होंने अपने सभी चुनावी वायदे पूरे कर लिए हैं. उनका आखिरी वादा दिल्ली में फ्री वाई-फाई था. जिसे पूरा करने की शरुआत हो चुकी है. लेकिन आपसे इस तरह कीउम्मीद नहीं थी. मुख्यमंत्री साहेब!
मैं वर्षों से दिल्ली में चलने वाली बसों में सफर कर रहा हूं. डीटीसी के ड्राइवर और कंडक्टर से भी अक्सर बात हो जाती है. आपका सबसे पहला वादा दिल्ली परिवहन निगम के अस्थाई ड्राइवर और कंडक्टर को पक्का करना था. जोकि अभी तक नहीं हुआ. डीटीसी के ड्राइवर और कंडक्टर न जाने कितनी बार धरने पर बैठे पर लेकिन उन्हें झूठा दिलासा दिया गया. कई बार उन्हें मजबूरी में अपनी हड़ताल वापस लेनी पड़ी. अभी तक हज़ारों डीटीसी ड्राइवर और कंडक्टर पक्के नहीं हुए है.
डीटीसी बस के प्रकार
अरविंद केजरीवाल और दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने पिछले दो महीने के अंदर 200 क्लस्टर बसों को इनॉग्रेट किया. लेकिन इससे किसका फायदा होगा? सबसे लोगों को क्लस्टर और डीटीसी बसों के डिफ्रेंस को समझना होगा. दिल्ली में अभी 4 तरह की डीटीसी बस (DTC Bus Type) हैं. एक हरे रंग की लो फ्लोर बस, लाल रंग की लो फ्लोर बस (जिन्हें हम एसी बसें कहते हैं), इलेक्ट्रिक बस जो सिर्फ तीव्र मुद्रिका और 522 रूट पर कुछ दिनों तक चली.
डीटीसी की डीएस सर्विस
चौथी कैटेगरी की बस में कोई भी आम आदमी सफर नहीं कर सकता. ये बसें DS रूट के नाम से चलती हैं. ये आमतौर पर पूरी खाली होती है. सवारी के नाम पर इसमें 10-15 लोग होते हैं. कभी-कभी इससे भी कम या फिर सिर्फ सिटिंग लायक. DS नंबर की ये बसें केंद्रीय सचिवालय के आस-पास वाले ऑफिस यानी सरकारी विभाग वाले ऑफिस से बनकर क चलती हैं. इनमें स्पेसिफिक लोग ही चलते हैं. यहां से चलने के बाद सिर्फ उसी जगह रुकती हैं, जहां इस बस में बैठी सवारी को उतरना है.
क्लस्टर बसें सरकारी नहीं
क्लस्टर बसें (Cluster Bus In Delhi) सरकारी बसें नहीं है. जिनका उद्घाटन आपने कैलाश गहलोत के साथ मिलकर किया. सबसे पहली बात इसमें डेली बनाए जाने वाले 40 और 50 रुपए वाले पास नहीं चलते हैं. जबकि अधिकत्तर लोग डेली पास से सफर करते हैं. इन बसों के ड्राइवर और कंडक्टर दिल्ली सरकार या परिवहन निगम नियुक्त नहीं करती है. ठेकेदारी के तहत कंपनी ही उन्हें नियुक्त करती है. कम सैलरी की वजह से एक ही ड्राइवर 16-18 घंटे की डबल शिफ्ट में काम करते हैं. कक्लस्टर बसें सरकारी बस डिपों में खड़ी होती हैं. इससे होने वाले फायदे को दिल्ली परिवहन निगम और सरकार को कोई फायदा नहीं है. क्लस्टर बसों पर सरकार का कोई स्वामित्व नहीं है. क्लस्टर बसों की एडवरटिजमेंट के जरिए भी कमाई होती है, डीटीसी की नहीं होती. डीटीसी के मुकाबले क्लस्टर बसें ज्यादा चलेंगी, तो इसकी कमाई भी ज्यादा होगी. इसमें नागरिक सुरक्षा गार्ड नहीं होता है. जबकि डीटीसी के बसों में होते नागरिक सुरक्षा गार्ड तैनात होते हैं.
ऑटो के बैज बांटने में धांधली
दूसरा दिल्ली (Transportation In Delhi) के दूसरे ट्रांसपोर्ट चैन यानी ऑटो को आपने बैज़ देने के लिए कहे. आपने बुराड़ी में कुछ लोगों को दिए, लेकिन इसमें काफी धांधली और भ्रष्टाचार सामने आया. ऑटो ड्राइवर से बैज के लिए हजारों रुपए लिए गए. बाद में इसे बंद करना पड़ना. अब भी हज़ारों ऑटो ड्राइवर बिना बैज़ के ऑटो चला रहे हैं.
सरकारी विभाग में दिहाडी़ और संविदा पर कर्मचारी
तीसरा आपने दिल्ली के सरकारी संस्थानों (Delhi Education System) और विभागों में ठेकेदारी और दिहाड़ी व्यवस्था को खत्म करने का भी वादा किया था, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ. जल विभाग, शिक्षा विभाग, परिवहन विभाग सहित तमाम विभागों में लोगों संविदा या दिहाड़ी के हिसाब से काम कर रहे हैं. यहां तक कि जिस दिल्ली सचिवालय में आप बैठते हैं, वहां भी सैंकड़ों लोग दिहाड़ी और संविदा पर काम कर रहे हैं.
मुफ्त की योजना बढ़ेगा राजधानी पर बोझ
रही बात आपके (Electricity Bill Free) बिजली मीटर के दाम आधे, पानी फ्री करने की स्कीम चुनावी रणनीति लगती है. आपके मुताबिक मान भी लिया जाए कि आपकी सरकार में भ्रष्टाचार नहीं हो रहा है और सरकार को हुए आर्थिक लाभ से आप ये सुविधाएं दे रहे हैं, तो मैं इसे सही नहीं मानता. क्योंकि आने वाली सरकार चाहे वो आम आदमी पार्टी को हो या फिर किसी ओर पार्टी की. राजधानी पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा. किराए में बढ़ोत्तरी जैसे कई अन्य दुष्परिणाम झेलने पड़ेंगे. दिल्ली बनाम केंद्र और मुख्यमंत्री बनाम उपराज्यपाल (Delhi CM Vs LG) का खेल फिर इससे भी ज्यादा व्यापक होगा.

No comments:
Post a Comment